भारतीय इतिहास में अनगिनत वीरांगनाओं ने अपने शौर्य, पराक्रम और सतीत्व की रक्षा के लिए अमर बलिदान दिए हैं। हमारी संस्कृति में “यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता:” की परंपरा सदियों से रही है। ऐसी ही एक असाधारण वीरांगना थीं राजकुमारी किरण देवी, जिनकी वीरता और साहस के आगे तथाकथित ‘महान’ मुगल अकबर को अपने प्राणों की भीख मांगनी पड़ी और अपने कुकृत्यों के लिए क्षमा याचना करनी पड़ी।
वीरांगना किरण देवी : परिचय एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
मेवाड़ राजवंश की राजकुमारी
वीरांगना किरण देवी 16वीं शताब्दी में मेवाड़ के शासक महाराणा उदयसिंह द्वितीय के पुत्र राजकुंवर शक्ति सिंह की सुपुत्री थीं। वह हिन्दुआ सूरज महाराणा प्रताप की भतीजी थीं। किरण देवी का जन्म मेवाड़ के सिसोदिया वंश में हुआ था, जो अपनी वीरता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध था।
पारिवारिक विवरण:
- पिता: राजकुंवर शक्ति सिंह (महाराणा उदयसिंह द्वितीय के द्वितीय पुत्र, रानी साज्जा बाई सोलंकी से जन्मे)
- बड़े पिता : महाराणा प्रताप (महान् मेवाड़ शासक, जो अकबर के समक्ष कभी झुके नहीं)
- पति: कुंवर पृथ्वीराज राठौड़ (बीकानेर नरेश राव कल्याणमल के पुत्र, महाराज रायसिंह के छोटे भाई)
महाराज शक्ति सिंह जी : महाराणा प्रताप के वीर भ्राता
शक्ति सिंह महाराणा प्रताप से मात्र कुछ माह छोटे थे। हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) में निर्णायक क्षण में वे अपने बड़े भाई महाराणा प्रताप को बचाने आए और दो मुगल सैनिकों को मार गिराया। इसके पश्चात् वे पुनः मेवाड़ लौट आए। शक्तावत राजपूतों की उत्पत्ति इन्हीं से है।
पृथ्वीराज राठौड़ : प्रसिद्ध कवि और वीर योद्धा
किरण देवी का विवाह बीकानेर के प्रसिद्ध कवि-योद्धा पृथ्वीराज राठौड़ से हुआ था। पृथ्वीराज (1549-1600 ई.) न केवल वीर योद्धा थे बल्कि डिंगल भाषा के महान कवि भी थे। उन्होंने “वेलि कृष्ण रुकमणी री”, “दशम भागवत रा दूहा” जैसी उत्कृष्ट रचनाएं कीं।
प्रसिद्ध घटना: जब महाराणा प्रताप कठिन परिस्थितियों में निराश हो गए थे और अकबर से संधि करने का विचार कर रहे थे, तब पृथ्वीराज राठौड़ ने उन्हें एक ओजस्वी पत्र भेजा जिसमें लिखा था:
“पातळ सूं पातशाह, बोले मुख हुंता।
सो किण बिध राणा, सिरै चढै न कुंता।”
इस पत्र ने महाराणा प्रताप के मन में पुनः राजपूती स्वाभिमान जगा दिया और उन्होंने कभी अकबर के समक्ष समर्पण नहीं किया।
वीरांगना किरण देवी की शिक्षा और युद्ध प्रशिक्षण
16वीं शताब्दी में राजपूत महिलाओं की शिक्षा
मेवाड़ और अन्य राजपूत राज्यों में राजघरानों की कन्याओं को उच्च शिक्षा दी जाती थी। उन्हें न केवल साहित्य, संगीत, कला में प्रशिक्षित किया जाता था, बल्कि अस्त्र-शस्त्र विद्या और युद्ध कौशल में भी निपुण बनाया जाता था।
प्रशिक्षण में शामिल कौशल:
- तलवार, कटार, भाला, धनुष-बाण का संचालन
- घुड़सवारी और रणनीति
- आत्मरक्षा तकनीकें
- युद्ध में निर्णय लेने की क्षमता
किरण देवी भी इसी परंपरा में अस्त्र-शस्त्र और युद्ध कौशल में पूर्णतः निपुण थीं। वह साहसी, निडर और स्वाभिमानी राजपूत महिला थीं जो अपने सतीत्व और मर्यादा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती थीं।
अकबर और नौरोज मेला (मीना बाजार) : एक काला अध्याय
मीना बाजार का वास्तविक स्वरूप
इतिहासकारों ने अकबर को ‘महान’ बताया है, परंतु नौरोज मेले (मीना बाजार) की घटनाएं उसकी विकृत मानसिकता को उजागर करती हैं। यह मेला वर्ष में नवरोज़ (फारसी नववर्ष) के अवसर पर 5-8 दिनों तक आयोजित होता था।
मीना बाजार की विशेषताएं:
- यह बाजार केवल महिलाओं के लिए था, पुरुषों का प्रवेश वर्जित था
- अकबर और कुछ राजकुमार ही इसमें प्रवेश कर सकते थे
- अकबर स्वयं महिला वेश (बुर्के) में घूमता था
- यह दिल्ली के आगरा किले में आयोजित होता था
- मुगल हरम की महिलाएं और अभिजात्य वर्ग की महिलाएं कपड़े, आभूषण और हस्तशिल्प बेचती थीं
अकबर के हरम का विवरण
ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, अकबर के हरम में 300 से अधिक पत्नियां थीं और कुल मिलाकर 5000 महिलाएं (दासियां, नर्तकियां, सेविकाएं) रहती थीं। इतालवी यात्री निकोलाओ मानूची ने अपने विवरण में लिखा है कि नौरोज मेले का उपयोग अकबर सुंदर हिंदू लड़कियों को अपने हरम में लाने के लिए करता था।
छल और दुराचार की योजना
मेले में जो भी महिला अकबर को पसंद आती, वह अपनी दासियों को निर्देश देता कि छल-कपट से उस महिला को हरम में लाया जाए। कई बार महिलाओं को सम्मान दिखाने या उपहार देने के बहाने अकबर के समक्ष लाया जाता था।
वीरांगना किरण देवी और अकबर : ऐतिहासिक घटना
मेले में किरण देवी का आगमन
एक दिन महाराणा प्रताप की भतीजी, महाराज शक्ति सिंह की पुत्री बाईसा किरण देवी भी अपनी सहेलियों के साथ नौरोज मेला देखने गई। वह उस समय बीकानेर के कुंवर पृथ्वीराज राठौड़ की पत्नी थीं। किरण देवी अत्यंत रूपवती और तेजस्वी थीं।
अकबर की कुदृष्टि
जब अकबर ने किरण देवी को देखा, तो वह उनके सौंदर्य पर मोहित हो गया। उसने तुरंत अपनी दासियों को आदेश दिया कि किसी भी प्रकार उस महिला को हरम में लाया जाए। दासियों ने छल-कपट से किरण देवी से कहा कि बादशाह उन्हें सम्मानित करना चाहते हैं और उपहार देना चाहते हैं।
निश्छल किरण देवी, जो राजपूत मर्यादाओं में पली-बढ़ी थीं, दासियों के साथ अकबर के हरम में चली गईं। उन्हें अकबर के नापाक इरादों का कोई आभास नहीं था।
सिंहनी का प्रहार
जैसे ही अकबर ने अपने दुराचारपूर्ण इरादों से किरण देवी को छूने का प्रयास किया, वीरांगना किरण देवी क्षण भर में समझ गईं कि यह एक षड्यंत्र है।
राजपूत सिंहनी ने तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक सिंहनी की भांति झपटकर अकबर की छाती पर चढ़ बैठीं और अपनी कमर से कटार निकालकर उसकी गर्दन पर रख दी।
ऐतिहासिक वर्णन
इस घटना का वर्णन कवि गिरधर आसिया द्वारा रचित “सगत रासो” ग्रंथ में पृष्ठ संख्या 632 पर इस प्रकार किया गया है:
“सिंहनी सी झपट, दपट चढ़ी छाती पर,
मानो षठ दानव पर, दुर्गा तेज धारी हैं।”
एक अन्य दोहा:
“किरण सिंहणी सी चढ़ी, उर पर खींच कटार।
भीख मांगता प्राण की, अकबर हाथ पसार॥”
अकबर की याचना
जब किरण देवी ने अपनी तीक्ष्ण कटार अकबर के गले पर रखी और वार करने को तैयार हुईं, तब अकबर भयभीत होकर उनके चरणों में गिर गया और प्राणों की भीख मांगने लगा।
किरण देवी ने क्रोध में कहा:
“दुराचारी! नीच! नराधम! मैं महाराणा प्रताप की भतीजी हूं। जिनके नाम से तुझे नींद नहीं आती। मैं मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश की राजकुमारी हूं और बीकानेर के पृथ्वीराज राठौड़ की पत्नी हूं। तेरी यह धृष्टता तुझे आज प्राणों से हाथ धोना सिखाएगी!”
अकबर का वचन
प्राणों की रक्षा के लिए अकबर ने कुरान की कसम खाकर किरण देवी से वचन दिया:
- आज के बाद कभी नौरोज का मेला (मीना बाजार) आयोजित नहीं होगा
- किसी भी महिला के साथ दुराचार या छल-कपट नहीं किया जाएगा
- जहां बीकानेर के महाराज पृथ्वीराज का निवास है, उस मार्ग से जीवनपर्यंत नहीं गुजरेगा
वीरांगना किरण देवी ने अपनी ठोकरों से अकबर को अधमरा कर दिया और उसे जीवन भर के लिए सबक सिखा दिया।
घटना के पश्चात्
अकबर की लज्जा
इस घटना के बाद अकबर कई दिनों तक अपने महल से बाहर नहीं निकला। उसे भारी लज्जा और अपमान का सामना करना पड़ा।
ऐतिहासिक तथ्य: इस घटना के पश्चात् वास्तव में अकबर ने नौरोज मेले (मीना बाजार) का आयोजन बंद कर दिया, जो उसकी पराजय और वीरांगना किरण देवी के साहस का प्रमाण है।
बीकानेर संग्रहालय में प्रमाण
बीकानेर संग्रहालय में एक प्रामाणिक पेंटिंग लगी है जिसमें यह ऐतिहासिक घटना दर्शाई गई है। पेंटिंग में किरण देवी को अकबर की छाती पर कटार रखते हुए दिखाया गया है, और नीचे उपरोक्त दोहा अंकित है।
यह पेंटिंग राजस्थान के इतिहास में वीरांगना किरण देवी के अद्वितीय शौर्य का ठोस प्रमाण है।
ऐतिहासिक स्रोत और प्रमाण
साहित्यिक स्रोत
- “सगत रासो” – कवि गिरधर आसिया द्वारा रचित (1755 ई. के बाद)
- यह ग्रंथ डिंगल भाषा में रचित है
- इसमें शक्ति सिंह और उनके शक्तावत वंश का विस्तृत वर्णन है
- पृष्ठ 632 पर किरण देवी की घटना का विस्तृत वर्णन
- बीकानेर के राजवंश के अभिलेख
- मेवाड़ के सिसोदिया वंश के ऐतिहासिक दस्तावेज
- इतालवी यात्री निकोलाओ मानूची का विवरण – मुगल दरबार और नौरोज मेले का वर्णन
भौतिक प्रमाण
- बीकानेर संग्रहालय में पेंटिंग – घटना का चित्रण
- मेवाड़ और बीकानेर के शाही अभिलेखागार में संबंधित दस्तावेज
वीरांगना किरण देवी का महत्व
नारी सशक्तिकरण का प्रतीक
वीरांगना किरण देवी 16वीं शताब्दी में नारी सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल थीं। उन्होंने यह सिद्ध किया कि:
- राजपूत महिलाएं केवल सुंदरता की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि वीरता और साहस की धनी थीं
- स्वाभिमान और मर्यादा की रक्षा के लिए वे किसी भी शक्तिशाली से टकराने को तैयार थीं
- अस्त्र-शस्त्र विद्या में प्रशिक्षित होना महिलाओं के लिए अत्यंत आवश्यक था
मेवाड़ और मारवाड़ का गौरव
किरण देवी ने अपनी वीरता से दोनों राजवंशों – मेवाड़ (सिसोदिया) और मारवाड़ (राठौड़) का नाम इतिहास में अमर कर दिया।
अकबर की वास्तविकता
यह घटना अकबर के तथाकथित ‘महानता’ पर प्रश्नचिह्न लगाती है और उसके वास्तविक चरित्र को उजागर करती है। इतिहासकारों ने जिसे ‘अकबर महान’ बताया, वह वास्तव में:
- महिलाओं के प्रति सम्मान की कमी रखता था
- छल-कपट से निर्दोष महिलाओं को हरम में लाता था
- अपनी शक्ति का दुरुपयोग करता था
संदर्भ ग्रंथ और स्रोत
- गिरधर आसिया – “सगत रासो”, पृष्ठ 632 (डिंगल भाषा)
- महिला उत्थान मंडल – “अथाह शौर्य की धनी: किरण देवी”
- बीकानेर संग्रहालय – ऐतिहासिक पेंटिंग और दस्तावेज
- Times Now News – Meet Kiran Devi Rathore, The Queen Who Made Akbar Beg For Mercy (March 25, 2025)
- My India My Glory – Akbar a Philanderer? How He Begged Kiran Devi Rathore for His Life (August 31, 2019)
- Wikipedia – Meena Bazaar
- Wikipedia – Shakti Singh (16th century Indian noble)
- En Route Indian History – “Meena Bazaar: The Market for the Women of Zenana” (October 23, 2022)
- Scroll.in – “The making of Akbar’s complicated harem, where Rajput women played a critical role” (April 29, 2020)
- हिंदवी – पृथ्वीराज राठौड़ का जीवन परिचय
- भारतकोश – “पृथ्वीराज द्वारा राणा प्रताप का स्वाभिमान जाग्रत करना”
निष्कर्ष
वीरांगना किरण देवी प्रतीक है सम्पूर्ण मातृ शक्ति की , शौर्य की , पराक्रम की । हमारे यहां ” यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता: “की संस्कृति रही हैं। हमारी पावन संस्कृति में अनगिनत वीरांगनाओं ने अपने सतीत्व की रक्षार्थ जौहर किए हैं। ऐसी ही वीरांगना किरण देवी जिनकी वीरता और पराक्रम के कारण अकबर को अपने प्राणों की भीख मांगनी पड़ी।
वीरांगना किरण देवी ने अपनी वीरता और क्षत्रियत्व से मेवाड़ और मारवाड़ (बीकानेर) दोनों का इतिहास में नाम अमर कर दिया ।
वीरांगना किरण देवी का जीवन संपूर्ण मातृशक्ति, शौर्य और पराक्रम का प्रतीक है। उन्होंने अकबर जैसे शक्तिशाली सम्राट को अपने साहस और निर्भयता से नतमस्तक कर दिया।
मुख्य संदेश:
- नारी शक्ति किसी भी परिस्थिति में अपराजेय है
- स्वाभिमान और मर्यादा सर्वोपरि हैं
वीरांगना किरण देवी की गाथा आज भी मेवाड़ी और राजस्थानी जनमानस के मुख पर जीवित है और प्रत्येक भारतीय नारी के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगा।
इतिहास में अनेक ऐसी घटनाओं का वर्णन ही नहीं किया गया , क्योंकि इन तुर्क आक्रांताओं को महान बताना था। आजादी के बाद भी तुष्टिकरण की नीति के कारण हमें यहीं बताया गया। क्षत्रिय संस्कृति (kshatriyasanskriti) के माध्यम से मै आपको प्रामाणिक और सत्य घटना बताऊँगा। आपके सुझाव हमे भेजे। आपके सुझाव हमारा मार्गदर्शन करेंगे।
खास आपके लिए –

कृपया इनसे संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेज दे वे।
मैने रिसर्च किया है और महाराज शक्ति सिंह जी पर अभी भी रिसर्च चल रहा है अभी तक हमें कोई भी प्रामाणिक दस्तावेज नहीं मिले है है । अपने सगत रसों का जिक्र किया है वह प्रमाणिक नहीं है उसमें बाद में कल्याण से लिया गया हाईनेस बता कर जोड़ा है। पृथ्वीराज जी की दो पत्नियां थी वो भी भट्ठियांनी जी जैसलमेर से।