जौहर : सतीत्व रक्षार्थ सर्वस्व समर्पण

जौहर शब्द में शौर्य , त्याग , बलिदान नारी जीवन की अस्मिता , निष्कलंकता और प्राणोत्सर्ग की उद्दात भावना का समावेश रहा है। जिस प्रकार जौहरी रत्नों की निष्कलुशिता की परख करता है। उसी प्रकार जौहर ने समाज एवं संस्कृति को पतित होने से रोकने में अपना जीवन समर्पित कर दिया है। 

जौहर क्या है :-

कर्नल जेम्स टॉड (A Historian) के अनुसार –  

O ! the galaxy of those brave , determined , women – mothers , daughters , sisters , who had willingly and unflinchingly embraced the leaping flames of  ” Johur ” lest theerass desires of a savage and barbarous horde desecrate their persons ? – a galaxy well worthy of being …..celestiafied higher than the nabulous galaxies , at the very feet of God . 

1.  ” ……. nor can we doubt that , educated as are the females of that country , they gladly embrace such a refuse from pollution . Who would not be a Rajput in such a case ? ….. ” 

‘ राष्ट्रकवि ‘ मैथिलीशरण गुप्त ने  ” जौहर ” पर सटीक शब्दों में निम्न वर्णन प्रस्तुत किया है जो पठनीय है — 

” विख्यात थे जौहर यहां के आज भी है लोक में ।  हम भग्न है उन ‘पद्मिनी ‘ सी देवी ओ की शोक में ।।

” आर्य स्त्रियां निज धर्म पर मरती हुई डरती नहीं । साधान्त सर्व सतीत्व शिक्षा विश्व में मिलती नहीं ।।

सुकवि  ‘ दिनकर ‘ ने भाव विभोर होकर कहा है कि  — 

” कितनी द्रुपदा के बाल खुले , कितनी कलिओ का अन्त हुआ ।

 कह हृदय खोल चित्तौड़ , कितने दिन जौहर बसन्त हुआ ।।

इतिहासकार डॉ . लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ के अनुसार —

” History is awash with many an illuminating tale , But ; no where in its cavernous collection , one cantrace . The unrivalled example of a beloved Handing over the blade of a sword to her dearest ! “

डॉ . लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ की अपनी काव्य कृति में ( The Johar of Padmini) निम्न उद्गार बहुत ही सुन्दर बन पड़े हैं — 

Thus spoke ! Padmini paused and then continued : ‘Johar ‘ is the highest form of sacrifice An offering of one’s honour to him At whose touch the soul attains everlasting chastity .

‘ Johar ‘ is without blemish . It flame is imperishable . where soul’s splendour is unfaded glory shine . 

Over its undying embers. ‘ Johar ‘ is the zenith of bravery where one is willing to face pain . To bring into existence  A brave new world of enduring existence . 

‘  Johar ‘ is faith supreme , A miracle of an astral body , Inspired by occult power. That lifts the soul to the highest pinnacle . ‘ Johar ‘ is for immortal ,Where one can test the power of her soul   And fling one self joyously,

In the unfailing bowers of paradise . Let the flame of ‘ Johar ‘ … Burn in purified glory …. Let it burn bright red …. And illumine for ever the page of History . 

Let the fires of Johar… Awaken the hiroes dead…. And make them feel proud….. Of the sacrifices we made . Let the head of our dead…. Be held high and aloft ………. Over the pride of blazing Johar …. Emblazoned with immortal blaze.

महारानी पद्मिनी के जौहर पर डॉ . एल एस राठौड़ ने मार्मिक चित्रण किया है — 

” Her dazzling ‘Johar ‘  !  Her bright pyre…. Burn up with blazing fire…. And the golden flames in radiance swelled… Spreading far and wide , the saga of a deathless heroine . 

Across the firmament , … Padmini ‘s  soul echoed aloud :  Awake !  the world is for the brave …. Keep your freedom intact …. And don’t let your spirits droop .

Fare well ! Glorious Chittor … Fare well !  To the abode of the brave…. Fare well !  To the determined and the unyielding …. Ages shall not fade their name and their sacrifices .

जौहर – शाका  : — 

जौहर

मध्यकाल की युद्ध प्रणाली में दुर्गों का विशेष महत्व था , दुर्गों को अभेद्य एवं सुरक्षात्मक माना जाता था। शत्रु द्वारा किले को घेर लेने पर महीनों की रसद एवम् भोजन सामग्री एकत्रित करके दरवाजे बंद कर दिए जाते थे । शत्रुओं से टुकड़ियों में झड़पे होती रहती थीं । शत्रु के प्रबल होने पर भोजन सामग्री एवम् रसद समाप्त हो जाती थीं और तब अंतिम निर्णायक खुला युद्ध लड़ने के सिवाय कोई चारा नहीं रह जाता था

ऐसी परिस्थिति उत्पन्न होने पर दुर्ग में उपस्थित महिलाओं का सामूहिक अग्नि समर्पण जौहर के नाम से प्रसिद्ध हुआ । संभवतः यह शब्द अरबी / फारसी या हिब्रू भाषा से आया है। जिसका अर्थ होता है ” बेमिसाल करिश्मा ”

मुस्लिम आक्रांताओं ने भी जब यह देखा कि दुर्ग की समस्त सेना केसरिया कसूमल बाना पहन कर बाहर निकल बाहर निकल आई है एवम् अभूतपूर्व वीरता दिखा कर शत्रु में त्राहि त्राहि मचा कर समाप्त हो गई है । स्वाधीनता हेतु यह मृत्यु सुख शाका के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

किले में कहीं कोई हलचल नहीं , नीरव निस्तब्धता चील , कोवों की कांव कांव या दूर किसी श्वान के रोदन के सिवाय कोई आवाज नहीं। शत्रु पक्ष अपनी विजय से उल्लासित तो होता परन्त दुर्ग में प्रवेश के बाद उसकी बैचेनी बढ़ जाती । किले में कहीं कोई हलचल नहीं, नीरव निस्तब्धता , चील कोवों की कांव कांव या दूर किसी श्वान के रोदन के सिवाय कोई आवाज नहीं । एक गहरा सन्नाटा ………….. ।

शत्रु सेना को खबर मिलती है दुर्ग (किले) में भयंकर आग लगी हुई है । अब वहा राख और कोयलो के सिवाय कुछ नहीं है । ऐसा लगता है जैसे सब कुछ जला दिया है । शत्रु सेना भी कहने लगती है । तोबा – तोबा ! क्या इंसान हैं ? ऐसा जौहर न कभी देखा और न कभी सुना , या खुदा ….. । ऐसा तो सिर्फ राजपूत ही कर सकते हैं ।

हिन्दी शब्द सागर के अनुसार जौहर शब्द ‘ जीव ‘ और ‘ हर ‘ शब्द से मिलकर बना है । जिसके अनुसार गढ़ या किले में शत्रु का प्रवेश सुनिश्चित प्रतीत होने पर महिलाएं एवम् बच्चे दहकती हुई चिता में जल जाते थे । इसके अलावा जौहर का अर्थ उस चिता से भी है जो दुर्ग में महिलाओं के जलने के लिए बनाई जाती थी ।

किसी भी प्रारम्भिक मुस्लिम इतिहासकार ने जौहर शब्द का प्रयोग नहीं किया है । जबकि इन घटनाओं का विस्तृत वर्णन दिया है । इससे स्पष्ट है कि इस शब्द की उत्पत्ति और प्रयोग के बारे में शब्द कोश सहायक नहीं हो सकते । इस ऐतिहासिक एवम् गरिमामय शब्द ने अपना जौहर दिखा कर शब्दकोशो को अलंकृत किया है।

संक्षेप संक्षेप में जौहर शब्द में शौर्य , त्याग , बलिदान , नारी जीवन की अस्मिता , निस्कलंकता और प्राणोत्सर्ग की उद्दात भावना का समावेश रहा है । जिस प्रकार जौहरी रत्नों की निष्कलुशिता की परख करता है। उसी प्रकार जौहर ने समाज एवं संस्कृति को पतित होने से रोकने में अपना जीवन समर्पित कर दिया है ।

विविध मान्यताओं के अनुसार संसार का सर्व प्रथम जौहर ईसा से 500 वर्ष पूर्व राजा क्रोस के समय हुआ था, जब क्रोस के ऊपर फारस के राजा कुरुष ने हमला किया ।

भारत में सबसे प्राचीन व प्रथम जौहर 327 ईसा पूर्व में सिकन्दर के आक्रमण के समय पंजाब के अगल्लसोई गणराज्य में हुआ एवम् संसार का सबसे अन्तिम जौहर इंडोनेशिया के बाली द्वीप में डचों के आक्रमण से वहा के राजा देवावांग के मारे जाने पर सम्वत 1908मे हुआ ।

उपरोक्त घटनाओं में नारियों ने सामूहिक प्राणोत्सर्ग तो किया परन्तु उनको जौहर शब्द से जोड़ना कठिन है । भारत में मुस्लिम आक्रांताओं के साथ इस स्थिति में व्यापक परिवर्तन आया ।

मोहमद बिन कासिम का सिंध पर आक्रमण 712 ई . में हुआ। राजा दाहर वीरतापूर्वक लड़ता हुआ मारा गया । उसकी पत्नी बाई ने रावर दुर्ग में जौहर किया। इसी राजा की दूसरी पत्नी लाड़ी ने ब्रह्मणाबाद दुर्ग में दूसरा प्रयास किया जो शत्रु के आ जाने के कारण सफल नहीं हो सका । इसे भारतीय इतिहास में प्रथम जौहर की संज्ञा दी जाती हैं ।

राजपुताने का प्रथम जौहर 725 ई. में गोगामेड़ी के ठाकुर की गढ़ी में सम्पन हुआ । मोहम्मद गजनवी के आक्रमण के समय 1004 ई . में भटनेर के शासक विजय राव भाटी के परिवार की स्त्रियों ने आत्मोत्सर्ग किया था । 1060 ई . में बचौरा के तंवरो ने और 1232 ई . में ग्वालियर में जौहर होने के उल्लेख मिलते हैं ।

प्रमुख जौहर : –

भारतीय इतिहास में तुर्क आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल को जौहर युग कहा जा सकता हैं । इस सुल्तान की साम्राज्यवादी विस्तार की भावना, अर्थ संग्रह की लिप्सा एवम् सुन्दर स्त्रियों को प्राप्त करने की कामेच्छा ने समस्त भारत को उद्वेलित किया, परंतु राजपुताने को इसकी सर्वाधिक कीमत चुकानी पड़ी ।

  • रणथंभोर 1301 ई.
  • सिवाना 1301 ई .
  • चित्तौड़ (पहलाशाका) 1303 ई .
  • जालौर 1311 ई.
  • जैसलमेर तिथि प्रमाणित नहीं
इसके बाद दिल्ली के सुल्तानो एवम् प्रांतीय मुगल शासकों के आक्रमणों से जौहर किए जाते रहे। जिनमें प्रमुख इस प्रकार है —
स्थानवर्षआक्रांता
1 कंपिल………मुहम्मद तुगलक
2 जैसलमेर1368 ई .फिरोज तुगलक
3 भटनेर1398 ई .तैमूरलंग
4 गांगरॉन (झालावाड़)1423 ई .गुजरात का सुल्तान
5 गांगरॉन (झालावाड़)1444 ई.मालवा का सुल्तान
6 चांपानेर (गुजरात)1484 ई.गुजरात का सुल्तान
7 चित्तौड़ का दूसरा शाका1535 ई.गुजरात का सुल्तान
8 जैसलमेर1550 ई.कांधार का अलीखान
9 चित्तौड़ का तीसरा शाका1568 ई.अकबर
10 चौरागढ़ (रानी दुर्गावती)………..सेनापति आसफ खां

1857 के स्वतंत्रता संग्राम में भी रोडियागढ़ और जगदीशपुर की वीरांगनाओं ने अग्रेजों के आक्रमण के समय जौहर किया ।

धन्य है वो वीरांगनाएं जिन्होंने धर्म के इस युद्ध अपने स्वामियों को युद्ध में भेज दिया। और अपने शील और सतीत्व की रक्षार्थ अपने आपको पवित्र अग्नि में समर्पित कर दिया। अपने छोटे छोटे पुत्रों सहित अग्नि का वरण कर लिया। नमन है बारम्बार वीरांगनाओं को ।

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