धर्म
“धर्म” – क्षत्रिय धर्म के मूल सिद्धांत, प्रतिज्ञाएँ एवं ऐतिहासिक आख्यान। यहाँ उन महान विचारों एवं कथनों का संकलन है, जिन पर क्षत्रिय समाज की नींव टिकी है – जैसे ‘वीर भोग्या वसुंधरा’, ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’, एवं ‘क्षतात् त्रायते इति क्षत्रिय:’। साथ ही, रघुकुल की ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ की परम्परा, अधर्म एवं अन्याय से प्रजा की रक्षा का कर्तव्य, यह कैटेगरी क्षत्रिय धर्म की आत्मा को दर्शाती है।