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    Homeसंस्कृतिमुहूर्त एवं ज्योतिष उपायअक्षय तृतीया 2026: सही तिथि, समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    अक्षय तृतीया 2026: सही तिथि, समय, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    अक्षय तृतीया-एक ऐसा पावन पर्व, जिसकी महिमा सनातन परंपरा में “अक्षय” अर्थात् कभी न क्षीण होने वाले पुण्य से जुड़ी है। यह दिवस केवल तिथि नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा का वह दुर्लभ संगम है, जब बिना विशेष मुहूर्त देखे भी हर शुभ कार्य सिद्ध माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजन अनंत फल प्रदान करते हैं, जो जीवन में स्थायी समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का द्वार खोलते हैं।

    Table of Contents

    वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का आगमन विशेष संयोगों के साथ हो रहा है, जब शुभ मुहूर्त और तिथि का प्रभाव साधकों और गृहस्थों दोनों के लिए अत्यंत फलदायी रहेगा। इस पावन अवसर पर देवी-देवताओं की कृपा सहज ही प्राप्त होती है, और जीवन में सौभाग्य, धन, शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आइए जानते हैं इस दिव्य पर्व की तिथि, समय और वे शुभ क्षण, जो आपके हर संकल्प को अक्षय बना सकते हैं।

    चूंकि हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) चंद्र एवं सौर गणनाओं पर आधारित है, इसलिए तिथियाँ प्रतिवर्ष बदलती रहती हैं। आइए, वर्ष 2026 के लिए सटीक जानकारी जाने

    अक्षय तृतीया 2026

    हिंदू धर्म (Hinduism) में तीन दिन और साढ़े तीन मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना गया है। अक्षय तृतीया इन्हीं में से एक है। ‘अक्षय’ का अर्थ है – “जो कभी नष्ट न हो”। मान्यता है कि इस दिन किया गया कोई भी दान, जप या शुभ कार्य अनंत (Infinite) हो जाता है।

    लेकिन एक बड़ी समस्या है – प्रायः सभी लोग इस दिन को लेकर भ्रमित रहते हैं। क्या पर्व 19 अप्रैल को मनाएँ या 20 अप्रैल को? क्या सुबह 6 बजे पूजा करें या दोपहर में?

    आइए, इस लेख में हम पंचांग की सटीक गणना, वैदिक नियमों और व्यावहारिक सुझावों के साथ सब कुछ स्पष्ट करते हैं।

    अक्षय तृतीया का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व

    पौराणिक कथाएँ

    1. त्रेता युग का आरंभ:
    मान्यता है कि आज ही के दिन त्रेता युग प्रारंभ हुआ था। यह वह युग था जब भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था।

    2. गंगा का धरती पर अवतरण:
    इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    3. सुदामा और कृष्ण :
    यह वही दिन था जब भगवान कृष्ण के बाल सखा सुदामा ने चावल लेकर द्वारका का रुख किया। बिना कुछ माँगे ही उनकी झोंपड़ी सोने से भर गई। यह कथा हमें सिखाती है – सच्चा प्रेम और विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है।

    4. अक्षय पात्र :
    महाभारत के वनवास काल में भगवान सूर्य ने द्रौपदी को अक्षय पात्र नामक चमत्कारी बर्तन दिया था, जो कभी खाली नहीं होता था। यह बर्तन इसी दिन प्राप्त हुआ था।

    वैदिक प्रमाण

    मदनरत्न (Madanratna) ग्रंथ में कहा गया है:

    “अस्यां तिथौ क्षयमुपैति हुतं न दत्तं। तेनाक्षयेति कथिता मुनिभिस्तृतीया॥”

    अर्थ: हे राजन, इस तिथि पर किया गया हवन या दान कभी समाप्त नहीं होता। इसलिए ऋषियों ने इसे ‘अक्षय तृतीया’ नाम दिया है।

    अक्षय तृतीया 2026: सही तिथि और समय (Correct Date & Time)

    तिथि गणना (Tithi Calculation)

    वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया की तिथियाँ निम्नलिखित हैं:

    विवरण (Detail)दिनांक एवं समय (Date & Time)
    तृतीया तिथि प्रारंभ (Tritiya Begins)19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:49 बजे (10:49 AM)
    तृतीया तिथि समाप्त (Tritiya Ends)20 अप्रैल 2026, प्रातः 07:27 बजे (07:27 AM)

    अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य

    कृपया ध्यान दें: 19 अप्रैल 2026 को सूर्योदय (Sunrise) के समय – लगभग प्रातः 05:57 बजे – द्वितीया तिथि (Dwitiya Tithi) होगी, तृतीया नहीं।

    यानी यदि आप 19 अप्रैल को सुबह 6 बजे उठकर पूजा-पाठ कर लेंगे, तो वह पूजा द्वितीया तिथि पर होगी, अक्षय तृतीया पर नहीं।

    अतः अक्षय तृतीया का पुण्य प्राप्त करने के लिए प्रातः 10:49 बजे के बाद ही पूजा, दान या खरीदारी प्रारंभ करें।

    शुभ मुहूर्त

    अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ (Abujh Muhurat) कहा जाता है – अर्थात पूरा दिन शुभ है। फिर भी, कुछ विशेष समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं।

    1. पूजा का शुभ मुहूर्त

    समय: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक

    यह वह समय है जब तृतीया तिथि अपने प्रारंभिक चरण में होती है और सूर्य एवं चंद्रमा का प्रभाव सर्वाधिक शुभ माना जाता है। इस दौरान माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें।

    2. सोना एवं अन्य वस्तुएँ खरीदने का मुहूर्त

    समय: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, प्रातः 05:51 बजे तक

    यह लगभग 19 घंटे का समय है जो खरीदारी के लिए सर्वोत्तम है। इस अवधि में खरीदा गया सोना, चांदी या कोई भी नई वस्तु ‘अक्षय’ हो जाती है – अर्थात उसका महत्व और लाभ कभी कम नहीं होता।

    3. दान का सर्वोत्तम समय

    समय: 19 अप्रैल 2026, दोपहर 12:00 बजे से 03:00 बजे तक

    इस समय अन्न, वस्त्र, जल, छाता और तिल का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

    सूर्योदय एवं ब्रह्म मुहूर्त

    यदि आप प्रातः स्नान एवं जप करना चाहते हैं:

    घटनासमय
    सूर्योदय (Sunrise)प्रातः लगभग 05:57 बजे (स्थानानुसार थोड़ा भिन्न)
    ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurt)प्रातः 04:24 बजे से 05:12 बजे तक
    स्नान एवं संकल्प (Bath & Sankalp)प्रातः 05:57 बजे से पहले

    सावधान: यदि आप प्रातः स्नान कर रहे हैं, तो यह द्वितीया तिथि पर होगा। यह पाप नहीं है, लेकिन इससे ‘अक्षय तृतीया’ का विशेष पुण्य नहीं मिलेगा। अक्षय तृतीया का पुण्य प्रातः 10:49 बजे के बाद प्रारंभ होता है।

    प्रमुख शहरों के लिए मुहूर्त

    चूँकि सूर्योदय और ग्रहणीय स्थितियाँ स्थान के अनुसार बदलती हैं, यहाँ कुछ प्रमुख शहरों के लिए पूजा मुहूर्त (19 अप्रैल 2026) दिया जा रहा है:

    शहरसूर्योदयतृतीया प्रारंभपूजा मुहूर्त
    दिल्ली 05:57 AM10:49 AM10:49 AM – 12:20 PM
    मुंबई 06:21 AM10:49 AM10:49 AM – 12:42 PM
    कोलकाता 05:15 AM10:49 AM10:49 AM – 11:52 AM
    बेंगलुरु 06:06 AM10:49 AM10:49 AM – 12:32 PM
    चेन्नई 05:55 AM10:49 AM10:49 AM – 12:28 PM
    जयपुर06:03 AM10:49 AM10:49 AM – 12:25 PM

    (नोट: उपरोक्त समय सामान्य दिशा-निर्देश हैं। अत्यधिक सटीकता के लिए स्थानीय पंचांग अवश्य देखें।)

    चोगड़िया मुहूर्त – खरीदारी के लिए विशेष

    चोगड़िया (Choghadiya) एक सरल प्रणाली है जो दिन और रात को 8 भागों में बाँटती है। अक्षय तृतीया 2026 पर निम्नलिखित शुभ चोगड़िया में खरीदारी करना विशेष फलदायी होगा:

    समयचोगड़ियाशुभता
    प्रातः 10:49 AM – 12:20 PMअमृत, चरअत्यंत शुभ
    दोपहर 01:58 PM – 03:35 PMशुभशुभ
    सायं 06:49 PM – 08:22 PMशुभशुभ
    रात्रि 09:55 PM – 10:57 PMअमृतअत्यंत शुभ

    ज्योतिषीय महत्व

    इस दिन सूर्य मेष राशि (Aries) में अपनी उच्चतम स्थिति में होता है और चंद्रमा वृषभ राशि (Taurus) में – जो स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है।

    ज्योतिष की भाषा में इसे ‘स्वयं सिद्ध मुहूर्त’-कहा जाता है – अर्थात ब्रह्मांड की ऊर्जा स्वतः ही शुभ कार्यों के लिए सक्रिय हो जाती है। इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य (नया बिजनेस, गृह प्रवेश, विवाह, नौकरी प्रारंभ) के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती।

    अक्षय तृतीया पूजा विधि

    आवश्यक सामग्री

    • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र
    • कलश (Kalash) – जल, आम के पत्ते और नारियल सहित
    • रोली (Roli), चावल (Akshat), फूल (Flowers)
    • धूप (Incense), दीपक (Lamp), नैवेद्य (भोग – मीठा, फल)
    • पीले वस्त्र (Yellow Clothes) – पीला रंग इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है

    पूजा के चरण

    1. प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में जागें और स्नान करें। यदि संभव हो तो गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
    2. स्वच्छ वस्त्र धारण करें – पीले रंग के वस्त्र विशेष शुभ होते हैं।
    3. संकल्प लें : “मैं अक्षय तृतीया के पुण्य दिवस पर भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा करता हूँ, जिससे मेरे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो।”
    4. प्रातः 10:49 बजे के बाद पूजा प्रारंभ करें।
    5. भगवान गणेश का स्मरण करें – “ॐ गण गणपतये नमः
    6. भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी का ध्यान करें और उन्हें रोली, चावल, पुष्प अर्पित करें।
    7. मंत्र जाप : निम्नलिखित मंत्रों का 108 बार जाप करें:
    • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
    • ॐ श्री लक्ष्मी नारायणाय नमः
    1. भोग लगाएं: मीठा (खीर, हलवा या मिश्री) और फल अर्पित करें।
    2. आरती करें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
    3. दान करें – अन्न, वस्त्र, जल, छाता, जूते या तिल का दान करें।

    इस दिन क्या खरीदें?

    जबकि बाजार में सोने (Gold) की होड़ मच जाती है, शास्त्रों में कुछ अन्य वस्तुओं को भी अत्यंत शुभ बताया गया है:

    वस्तुमहत्व
    सोना माता लक्ष्मी का प्रतीक – धन में वृद्धि
    चांदी चंद्रमा का प्रतीक – मानसिक शांति
    नमक (Salt)जीवन का स्वाद – रोगों से मुक्ति
    चीनी/गुड़ मिठास – वाणी में माधुर्य
    हल्दी आयुर्वेदिक औषधि – रोग प्रतिरोधक क्षमता
    तांबा जल शोधक – स्वास्थ्य लाभ
    अन्न सबसे बड़ा धन – कभी नष्ट न होने वाला

    इस दिन क्या दान करें?

    दान को अक्षय तृतीया का सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। याद रखें – बिना दान किए इस दिन को समाप्त न करें।

    दान सामग्रीलाभ
    अन्न कभी भूखा नहीं रहना पड़ता
    जल प्यास का नाश, मानसिक शांति
    वस्त्र सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि
    छाता विपत्तियों से रक्षा
    जूते यात्रा में सुरक्षा
    तिल पितरों का उद्धार
    गाय को हरा चारा सभी पापों का नाश

    अक्षय तृतीया पर क्या न करें?

    • किसी से झगड़ा न करें – क्रोध इस दिन किए गए सभी पुण्य को नष्ट कर देता है।
    • कंजूसी न करें – बिना दान किए दिन समाप्त न करें।
    • तामसिक भोजन – मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज का सेवन वर्जित है।
    • सूर्यास्त के बाद नई वस्तु खरीदने से बचें (यदि संभव न हो तो कोई निषेध नहीं)।

    FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    प्रश्न 1: क्या 19 अप्रैल 2026 को सुबह 6 बजे पूजा कर सकते हैं?

    उत्तर: नहीं, 19 अप्रैल को सुबह 6 बजे द्वितीया तिथि होगी, तृतीया नहीं। अक्षय तृतीया का पुण्य प्रातः 10:49 बजे के बाद ही प्रारंभ होता है। इसलिए पूजा 10:49 बजे के बाद ही करें।

    प्रश्न 2: क्या 20 अप्रैल 2026 को अक्षय तृतीया मनाई जा सकती है?

    उत्तर: 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय (प्रातः 05:57 बजे) तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी (सुबह 07:27 बजे तक)। यदि आप ‘उदया तिथि’ को मानते हैं, तो 20 अप्रैल को प्रातः 05:57 बजे से 07:27 बजे के बीच पूजा कर सकते हैं। यह समय भी पूर्ण रूप से वैध और फलदायी है।

    प्रश्न 3: क्या अक्षय तृतीया पर केवल सोना खरीदना ही शुभ है?

    उत्तर: बिल्कुल नहीं। शास्त्र अन्न, नमक, चीनी, हल्दी और तांबा खरीदने को भी उतना ही फलदायी मानते हैं। वास्तविक ‘सोना’ अन्न है – इसलिए अनाज खरीदना सबसे उत्तम है।

    प्रश्न 4: क्या इस दिन व्रत रखना चाहिए?

    उत्तर: अक्षय तृतीया पर व्रत रखने का कोई अनिवार्य नियम नहीं है। यदि आप चाहें तो फलाहार (फल, दूध, मेवे) कर सकते हैं। मुख्य रूप से दान और पूजा पर ध्यान दें।

    प्रश्न 5: क्या गृह प्रवेश (Griha Pravesh) कर सकते हैं?

    उत्तर: हाँ, अक्षय तृतीया को ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार आरंभ आदि किए जा सकते हैं।

    प्रश्न 6: जैन धर्म में अक्षय तृतीया का क्या महत्व है?

    उत्तर: जैन धर्म में इसे अखा तीज कहते हैं। यह वह दिन है जब प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव ने एक वर्ष के कठिन उपवास के बाद राजा श्रेयांस कुमार के हाथों गन्ने का रस ग्रहण किया था।

    निष्कर्ष

    वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा, लेकिन केवल प्रातः 10:49 बजे के बाद ही। सुबह 6 बजे पूजा करने से अक्षय तृतीया का पुण्य नहीं मिलेगा – यह सबसे बड़ा भ्रम है जिसे हमने इस लेख में स्पष्ट किया है।

    यदि आप ‘उदया तिथि’ में विश्वास रखते हैं, तो 20 अप्रैल प्रातः 05:57 बजे से 07:27 बजे के बीच पूजा करें – यह समय भी पूर्णतः वैध है।

    अक्षय तृतीया केवल सोना खरीदने का दिन नहीं है – यह दान, जप और नए शुभ कार्यों के आरंभ का दिन है। सुदामा ने कुछ नहीं माँगा, फिर भी उन्हें सब कुछ मिला। यह दिन हमें सिखाता है कि बिना स्वार्थ के देना और बिना माँगे पाना ही सच्ची अक्षय पूंजी है।

    आइए, इस अक्षय तृतीया पर हम कुछ अच्छा करने का संकल्प लें, एक जरूरतमंद की सहायता करें, और जीवन में वास्तविक सुख एवं समृद्धि को आमंत्रित करें।

    इसे भी पढ़ें –

    Bhanwar Singh Thada
    Bhanwar Singh Thadahttp://kshatriyasanskriti.com
    Guardian of Kshatriya heritage and warrior traditions. Promoting Rajput history, dharmic values, and the timeless principles of courage, honor, and duty. Dedicated to cultural preservation and inspiring pride in our glorious past.
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